मुहावरे अकेले कमरे में नहीं बनते। वे चौपालों में बनते हैं। खेतों में बनते हैं। साझे दुःख-सुख में बनते हैं।
इस्लाम शुरुआत से ही युद्धरत रहा है, तो इसमें धर्म-परिवर्तन के लिए सहमति से आगे बढ़कर मारकूट और छल-छद्म का
ऐसे लोग बड़ी सङ्ख्या में हैं, जो सवेरे-सवेरे ख़ाली पेट गुनगुने पानी में शहद और नींबू का रस मिलाकर पीते

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